मंगलवार, 2 मार्च 2010

कानपुर में होली की मस्ती

कानपुर में होली का अपना अलग ही इतिहास है। यहाँ अवस्थित जाजमऊ और उससे लगे बारह गाँवों में पाँच दिन बाद होली खेली जाती है। बताया जाता है कि कुतुबुद्दीन ऐबक की हुकुमत के दौरान ईरान के शहर जंजान के शहर काजी सिराजुद्दीन के शिष्यों के जाजमऊ पहुँचने पर तत्कालीन राजा ने उन्हें जाजमऊ छोड़ने का हुक्म दिया तो दोनो पक्षों में जंग आरम्भ हो गइ। इसी जंग के बीच राजा जाज का किला पलट गया और किले के लोग मारे गये। संयोग से उस दिन होली थी पर इस दुखद घटना के चलते नगरवासियों ने निर्णय लिया कि वे पाँचवें दिन होली खेलेंगे, तभी से यहाँ होली के पाँचवें दिन पंचमी का मेला लगता है।
इसी प्रकार वर्ष 1923 के दौरान होली मेले के आयोजन को लेकर कानपुर के हटिया में चन्द बुद्धिजीवियों व्यापारियों और साहित्यकारों (गुलाबचन्द्र सेठ, जागेश्वर त्रिवेदी, पं0 मुंशीराम शर्मा सोम, रघुबर दयाल, बाल कृष्ण शर्मा नवीन, श्याम लाल गुप्त ‘पार्षद’, बुद्धूलाल मेहरोत्रा और हामिद खाँ) की एक बैठक हो रही थी। तभी पुलिस ने इन आठों लोगों को हुकूमत के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में गिरफतार करके सरसैया घाट स्थित जिला कारागार में बन्द कर दिया। इनकी गिरफ्तारी का कानपुर की जनता ने भरपूर विरोध किया। आठ दिनों पश्चात् जब उन्हें रिहा किया गया, तो उस समय ‘अनुराधा-नक्षत्र’ लगा हुआ था। जैसे ही इनके रिहा होने की खबर लोगों तक पहुँची, लोग कारागार के फाटक पर पहुँच गये। उस दिन वहीं पर मारे खुशी के पवित्र गंगा जल में स्नान करके अबीर-गुलाल और रंगों की होली खेली। देखते ही देखते गंगा तट पर मेला सा लग गया। तभी से परम्परा है कि होली से अनुराधा नक्षत्र तक कानपुर में होली की मस्ती छायी रहती है और आठवें दिन प्रतिवर्ष गंगा तट पर गंगा मेले का आयोजन किया जाता है।

10 टिप्पणियाँ:

M VERMA ने कहा…

होली की बधाई

जानकारी वर्धक

Shahroz ने कहा…

अजी हम तो कानपुर के ही हैं. कनपुरिया होली की चर्चा...लाजवाब !!

Ram Shiv Murti Yadav ने कहा…

फिर तो कनपुरिया होली बड़ी मजेदार निकली.

शरद कोकास ने कहा…

कानपुर मे होली की कथा के सातह यह कथा भी जुड-ई है जानकर अच्छा लगा ।

psingh ने कहा…

अच्छी जानकारी से सजी पोस्ट
आभार.................

raghav ने कहा…

कानपुर की होली का मिजाज ही अलग है..बेहतरीन पोस्ट.

Amit Kumar ने कहा…

उत्सवों कि परंपरा को रेखांकित करता महत्वपूर्ण ब्लॉग..बधाई.

Jandunia ने कहा…

कानपुर में होली को लेकर आपने अच्छी जानकारी दी है।

Udan Tashtari ने कहा…

पुरानी पोस्ट आज कहाँ से आ गई आज...!!

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

@ Udan Tashtri ji,
Purani nahin, ap is par deri se padhare hi.